महामारी अधिनियम, 1897 क्या है? | Mahamari Act 1897- सम्पूर्ण विवरण

महामारी अधिनियम, 1897 क्या है? | Mahamari Act 1897- सम्पूर्ण विवरण

                                  महामारी अधिनियम, 1897
                            (1897 का अधिनियम संख्यांक 3)
                                                                            [4 फरवरी, 1897]
(खतरनाक महामारियों के प्रसार की बेहतर रोकथाम का उपबन्ध करने के लिए अधिनियम)
महामारी अधिनियम, 1897 क्या है? | Mahamari Act 1897- सम्पूर्ण विवरण:- यह अधिनियम खतरनाक महामारियों जैसे प्लेग, हैज़ा इत्यादि के प्रसार की बेहतर रोकथाम करने के लिए बनाया गया. यह अधिनियम जैसे आप जानते हो अंग्रेजो के समय बनाया गया था. जिस समय यह बनाया था तब प्लेग या हैज़ा जैसी सुक्ष्म जीवों की महामारी फेल जाती थी तो पुरे के पुरे ग्राम को मार कर देती थी. यह छुआछूत की बीमारी थी यह तुरंत एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हो जाती थी. इसे आज community spread कहते है. इसमे कुल मिलकर केवल चार धाराएं है. पहली धारा में इस अधिनियम का संछिप्त नाम, विस्तार दूसरी धारा में राज्य तथा केंद्र सरकार की शक्तियों का जिक्र है, तीसरा सेक्शन इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी विनियम या आदेश की अवज्ञा करने वाले किसी व्यक्ति को दंड देने के विषय में है. मूल अधिनियम निम्न  प्रकार है -

महामारी अधिनियम, 1897 क्या है? | Mahamari Act 1897- सम्पूर्ण विवरण
महामारी अधिनियम, 1897 क्या है? | Mahamari Act 1897- सम्पूर्ण विवरण

    धारा 1. संक्षिप्त नाम और विस्तार:-

    (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम महामारी अधिनियम, 1897 है।
    (2) इसका विस्तार, [उन राज्यक्षेत्रों के सिवाय, जो 1 नवम्बर, 1956 के ठीक पूर्व भाग ख राज्यों में समाविष्ट थे] सम्पूर्ण भारत पर है।

    धारा 2. खतरनाक महामारी के विशेष उपाय करने और विनियम विहित करने की शक्ति:- 

    (1) जब [राज्य सरकार] का किसी समय यह समाधान हो जाए कि '[राज्य] या उसके किसी भाग में किसी खतरनाक महामारी का प्रकोप हो गया है, या होने की आशंका है तब [राज्य सरकार यदि वह यह समझती है कि तत्समय प्रवृत्त विधि के साधारण उपबन्ध इस प्रयोजन के लिए पर्याप्त नहीं हैं तो, ऐसे उपाय कर सकेगी या ऐसे उपाय करने के लिए किसी व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगी या उसके लिए उसे सशक्त कर सकेगी, और जनता द्वारा या किसी व्यक्ति द्वारा या व्यक्तियों के किसी वर्ग द्वारा अनुपालन करने के लिए सार्वजनिक सूचना द्वारा ऐसे अस्थायी विनियम विहित कर सकेगी जिन्हें वह उस रोग के प्रकोप या प्रसार की रोकथाम के लिए आवशक समझे और वह यह भी अवधारित कर सकेगी कि उपगत व्यय (जिनके अन्तर्गत प्रतिकर, यदि कोई हों, भी है) किस रीति से और किसके द्वारा चुकाए जाएंगे।
    (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना [राज्य सरकार] निम्नलिखित के लिए उपाय कर सकेगी और विनियम सहित विहित कर सकेगी।
    *(क )- विलोपित 
    (ख) रेल द्वारा या अन्य प्रकार से यात्रा करने वाले व्यक्तियों का निरीक्षण तथा उन व्यक्तियों का, जिनके बारे में निरीक्षक अधिकारी को यह शंका है कि वे ऐसे किसी रोग से संक्रमित हैं, किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में या अन्यत्र अलग रखने के लिए;
    2क. केन्द्रीय सरकार की शक्तियां जब केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो गया हो कि भारत अथवा उसके अधीन किसी भाग में किसी खतरनाक महामारी का प्रकोप हो गया है या होने की आशंका है और तत्समय प्रवृत्त विधि के साधारण उपबन्ध उस रोग के प्रकोप या प्रसार को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, तब केन्द्रीय सरकार [उन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है.] किसी पत्तन को छोड़ने वाले या उसमें आने वाले किसी पोत या जलयान के निरीक्षण के लिए और उसके, या उसमें यात्रा करने का आशय रखने वाले या उससे आने वाले किसी व्यक्ति के, निरोध के लिए उपाय कर सकेगी और ऐसे विनियम विहित कर सकेगी जो आवश्यक हों।]

    धारा 3. शास्ति:-

    इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी विनियम या आदेश की अवज्ञा करने वाले किसी व्यक्ति के विषय में यह समझा जाएगा कि उसने भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 के अधीन दण्डनीय अपराध किया है।

    धारा 4. अधिनियम के अधीन कार्य करने वाले व्यक्तियों का संरक्षण:-

    कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही ऐसी किसी भी बात के बारे में, जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई है या की जाने के लिए आशयित है, किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं होगी।
    -- महामारी अधिनियम, 1897 को youtube की वीडियो से नीचे देखें-

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