Police Station Crime Register (Records) | पुलिस थाना का अपराध रजिस्टर


Police Station Crime Register (Records) | पुलिस थाना का अपराध रजिस्टर

मस्कार दोस्तों, आज में इस लेख में बताने बाला हुँ पुलिस थाना पर प्रचलित अपराध रजिस्टर (Crime Register) के बारे में। अपराध रजिस्टर (Crime Register) पुलिस थाना पर प्रचलित बहुत ही महत्वपूर्ण रजिस्टर होता है। पुलिस का कार्य राज्य के अंतर्गत कानून व्यवस्था तथा अपराधों की रोकथाम करना होता है। भारत के संविधान की अनुसूची 7  में पुलिस और कानून व्यवस्था राज्य सूची का विषय होता है। पुलिस अपराध कारित होने पर मुकदमा कायम करती है और तफ्तीश कर दोषियों को सजा दिलाती है।
पुलिस जब मुकदमा कायम करती है तो मुकदमे की संख्याओं को एक रजिस्टर में इन्द्राज करती है। उसी रजिस्टर को अपराध रजिस्टर (Crime Register) कहा जाता है। जिले के हर थाना पर अलग अलग अपराध संख्या Police Station Wise किता होती है।
अपराध रजिस्टर (Crime Register) पुलिस थाना का बहुत ही महत्वपूर्ण रजिस्टर होता है। अपराध रजिस्टर (Crime Register) में वहुत से विवरण को लिखा जाता है। इस लेख में मैं आपको उन्ही विवरणों के बारे में बताऊंगा। अपराध रजिस्टर में क्या क्या विवरण लिखा जाता है ये जानना सामान्य नागरिकों के किये तो महत्वपूर्ण है ही साथ ही साथ उनके लिए भी महत्वपूर्ण है जो पुलिस की सेवा में आना चाहते है या वर्तमान में सेवारत है। यदि आपको  पुलिस के Records के बारे में पता होगा तो आप पूइस से सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत न केवल सूचना मांग पाएंगे वल्कि आप जागरूक होकर पुलिस से अपने साथ या अपने संवंधिओं के साथ होने वाले अपराध को पंजीकृत भी कर पाओगे।
अपराध रजिस्टर (Crime Register) में निम्नलिखित विवरणों को लिखा जाता है-
  • मुकदमा अपराध संख्या तथा वर्ष
  •  मुकदमे की धाराएं
  • वादी का नाम पता
  • प्रतिवादी का नाम पता
  • घटना दिनांक, घटना का समय
  •  घटना स्थल
  • सूचना का दिनांक तथा समय
  • घटना का विवरण
  • केस डायरी या CD का विवरण
  • मुकदमे की धाराओं तथा अभियुक्तों का बढ़ना या घटना
  • मुकदमा का परिणाम

Watch Youtube video On this topic-


अपराध रजिस्टर (Crime Register) में निम्नलिखित शीर्षक के collumn कटे होते है जिसमें विवरणों को लिखा जाता है जो प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार लिखा जाता है-
सभी को विस्तार से जानते है-

मुकदमा अपराध संख्या तथा वर्ष: 

सबसे पहले अपराध रजिस्टर (Crime Register)  में अपराध की संख्या तथा / में वर्ष लिखा जाता है। प्रत्येक अपराध की अपराध संख्या अलग अलग होती है जैसे बर्ष 2019 का पहला मुकदमा को 01/19 या 01/2019 लिखा जाएगा। 

धाराएं:

मुकदमा अपराध संख्या के साथ साथ धाराएं को सी लगी है प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार लिखा जाता है।

वादी का नाम व पता:

वादी शिकायत कर्ता को कहते है। शिकायतकर्ता पीड़ित भी हो सकता है और उसका रिश्तेदार भी। वादी का स्पष्ट नाम तथा पता भी लिखा जाता है।

प्रतिवादी का नाम व पता:

जिसके विरुद्ध मुकदमा लिखा जाता है उसे प्रतिवादी कहा जाता है। अपराध रजिस्टर में प्रतिवादियों का नाम व पता लिखा जाता है।

घटना दिनांक, घटना का समय:

जिस दिनांक तथा समय को पीड़ित के साथ उत्पीड़न या अपराध हुआ हो उसको भी अपराध रजिस्टर में लिखा जाता है।

सूचना का दिनांक तथा समय:

जिस दिनांक तथा समय को पीड़ित द्वारा पुलिस को शिकायत दर्ज कराई जाती है। अगर घटना घटित होने में तथा सूचना देने में देरी हुई है तो लिखा जाता है।

घटना स्थल:

जिस या जिन स्थानों पर पीड़ित के साथ अपराध हुआ हो उसे घटना स्थल कहते है। घटना स्थल को अपराध रजिस्टर में लिखा जाता है।

घटना का short विवरण:

प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित के साथ संक्षेप में अपराध का विवरण लिखा जाता है जिस पर अभियुक्त पर धाराएं लगती है।

केस डायरी या CD का विवरण:

जो मुकदमा की विवेचना करते है उनके द्वारा विवेचना को Case Diary में लिखा जाता है उसका विवरण अपराध रजिस्टर में लिखा जाता है। कितनी CD किता हुई हैं तथा विवेचना एक विवेचक द्वारा की गई है या कई विवेचक द्वारा। उन सभी विवेचकों को अपराध रजिस्टर में लिखा जाता है।

मुकदमे की धाराओं तथा अभियुक्तों का बढ़ना या घटना:

विवेचना से धाराएं बढ़ना या घटना, अभियुक्तों का नाम बढ़ना या घटना को भी अपराध रजिस्टर में लिखा जाता है।

मुकदमा का परिणाम:

अंत में मुकदमें का परिणाम लिखा जाता है। यदि मुकदमें में अभियुक्तों के विरूद्ध आरोप सत्य पाए जाते है तो Charge sheet या आरोपपत्र प्रेषित की जाती है। साक्ष्य के अभाव में अंतिम रिपोर्ट (Final Report) प्रेषित की जाती है। यदि आरोप झूठे पाए जाते है तो विवेचक अंतिम रिपोर्ट (Final Report) के साथ closure report भी प्रेषित की जाती है।
दोस्तों इसके अतिरिक्त भी जब वह मुकदमा Trail पर आता है तो अभियुक्त की जब जब न्यायालय से जमानत लेता है तब तब उसको अपराध रजिस्टर में लिखा जाता है। इस तरह से पुलिस थाना का अपराध रजिस्टर (Crime Register)  अघटन (UP to date) रहता है।
आशा करता हुँ की आपको ये लेख पसंद आया होगा।

Read also...
  1. पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें
  2. FIR और NCR में अंतर
  3. झूठी FIR से कैसे बचें | How to Cancel Fake FIR (Section 482 Crpc)
  4. FIR कौन दर्ज करा सकता है
  5. FIR के लिए प्रार्थना पत्र में क्या क्या लिखा जाता है
  6. FIR police complaint format hin hindi
  7. Legal Action for False FIR
  8. उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी तथा मुख्य आरक्षी सेवा नियमावली (प्रथम संशोधन) 2017




Post a Comment

0 Comments