Triple Talaq ordinance 2018, Now three-year jail term | तीन तलाक अब अपराध-सरकार का अध्यादेश


Triple Talaq ordinance 2018, Now three-year jail term | तीन तलाक अब अपराध-सरकार का अध्यादेश


केंद्र सरकार ने ट्रिपल तलाक (Triple Talaq ) पर अध्यादेश निकाला है। मुस्लिम महिलाओं के चेहरों पर गजब की खुशी है कि उन्हें तीन तलाक से मुक्ति मिलने की दिशा में सरकार ने तीन तलाक को अपराध वनाया है। गौतलव है कि सरकार ने गत बर्ष ट्रिपल तलाक को अपराध घोषित करने हेतु लोकसभा में विधेयक पेश किया था, जिसे सरकार ने लोक सभा मे पारित करा दिया था। लोक सभा में विधेयक का समर्थन कांग्रेस ने भी किया था । विधेयक लोक सभा से पास होकर राज्य सभा भेजा गया परंतु , राज्य सभा में कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक में कुछ संशोधन प्रस्ताव पेश किए, जिससे यह विधेयक अभी तक पारित नहीं हुआ है। यह विधेयक राज्य सभा में लंबित पड़ा है। सरकार ने इसे अब तक पारित नहीं होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा है। सरकार ने बताया कि दुनिया में 22 से अधिक मुस्लिम देशों में तीन तलाक को अपराध घोषित किया हुआ है लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहां पर ये प्रथा अभी तक चल रही है। सरकार ने कहा कि विधेयक पास न होने की वजह कांग्रेस ओर अन्य विपक्षी दल है जो मुस्लिमों का वोट बैंक की राजनीति के कारण उसे पास करने में रुकावट डाल रहे हैं। सरकार ने विपक्षी दलों से अपील की है कि इसे जल्दी पास कराने में सहयोग करें। बहुजन समाज  पार्टी प्रमुख मायावती ओर ममता बनर्जी जो महिला नेतृत्व वाली पार्टी है, से सरकार ने राज्य सभा मे इसे पारित कराने की अपील की है।


सरकार ने राज्यसभा में विधेयक लंबित होने के कारण तीन तलाक पर अध्यादेश निकाला है , जिस पर महामहिम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी बुधवार 18 सितंबर 2018 को हो गए है। अध्यादेश के वारे में चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई थीं जिसमें अध्यादेश को निकालने के बारे में चर्चा हुई थी। मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक को खत्म करने के लिए काफी दिनों से इंतजार कर रहीं थी। सरकार ने पहले विधेयक लोक सभा में प्रस्तुत कर, पारित कराकर तथा अब अध्यादेश लाकर मुस्लिम महिलाओं को समाज में पुरुष के बराबर होने लिए बहुत ही सराहनीय कार्य किया है। सरकार ने इस पर अध्यादेश लाकर इसे गैर जमानतीय अपराध बनाया है।
सरकार को अध्यादेश की समाप्ति से पहले ही राज्य सभा में पारित करना होगा नहीं तो यह 06 माह के बाद या संसद सत्र शुरू होने के बाद या बाद में शुरू होने बाली सभा के पहले सत्र से 06 सप्ताह तक पारित करना होगा नहीं तो यह अध्यादेश  स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।



तीन तलाक अब अपराध-सरकार का अध्यादेश | Triple Talaq ordinance- Now three-year jail term
तीन तलाक अब अपराध-सरकार का अध्यादेश | Triple Talaq ordinance- Now three-year jail term



अध्यादेश में निम्नलिखित मुख्य प्रावधान कियें गए है।

गैर-जमानतीय:

तीन तलाक को गैर जमानतीय अध्यादेश में वनाया गया है, लेकिन मैजिस्ट्रेट अगर उचित तथ्य पाते है तो जमानत दे सकते है। अध्यादेश से स्पष्ट है कि तीन तलाक में थाना से जमानत नहीं होगी। थाना को तीन तलाक के मुकदमों में जमानत अधिकार नहीं दिया गया है।

पीड़िता तथा उसके सगे संबंधीगण द्वारा मुकदमा लिखाना

अध्यादेश में यह भी प्रावधान है कि पीड़िता इस संबंध में खुद मुकदमा लिखा सकती है तथा उसके खून के रिश्ते के सगे संबंधी गण द्वारा भी तीन तलाक के सम्बंध में मुकदमा लिखाया जा सकेगा।

पत्नी की सहमति से समझौता योग्य:

मजिस्ट्रेट एसे मामलों में पत्नि की सहमति से यदि समझौता हो जाता है तो समझौता कर सकेंगे। इससे यह समझौता योग्य वनाया गया है। ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट अपने विवेक का इस्तेमाल कर समझौता होने की स्थिति में मामला समाप्त कर सकतें हैं।

दंड (Punishment)

नए आर्डिनेंस में 03 साल की सजा का प्रावधान किया गया है ।


तीन तलाक, बहु विवाह ओर निकाह हलाला काफी समय से सामचारो की सुर्खियों में है क्योंकि यह मुस्लिम धर्म में प्रचलित है। ये तीनो एक दूसरे से जुड़े हुए भी है। जानते है कि आखिर तीन तलाक क्या है

बहू विवाह-

मुस्लिम धर्म में प्रत्येक मर्द चार विवाह कर सकता है। यह विवाह सभी जीवित पत्नियों के जीवित रहते किया जा सकता है। इसी का लाभ लेकर के मुस्लिम मर्द अनेक जीवित पत्नियां साथ रख सकते हैं जिस कारण महिलाओं की स्थिति काफी दयनीय वनी रहती है।

तीन तलाक-

मुस्लिम पुरूष अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल दे तो केवल वोलने मात्र से तलाक मान लिया जाता है। इसको मजाक में भी नहीं बोला जाता। अगर मुस्लिम पुरूष मजाक में, नशे में या अन्य किसी तरीके से भी तीन तलाक बोल दे तो तीन तलाक बोलते ही तलाक माना जाता है। अब अगर उस पुरुष को पुनः अपनी पत्नी से निकाह करना है तो उसकी पत्नी का किसी दूसरे मर्द से निकाह कर हलाला कराया जाता है। जानते है कि निकाह हलाला क्या है।

निकाह हलाला-

जब तीन तलाक बोलने के बाद मुस्लिम पुरुष पुनः उसी महिला से विवाह करना चाहता है तो मुस्लिम महिला को हलाला से गुजरना पड़ेगा। मतलब यह है कि शौहर को अपनी पत्नी से पुनः शादी करने के लिए महिला को किसी गैर मर्द से शादी करना पड़ेगा ओर उसके साथ इद्दत तक रहना पड़ेगा। यानी कि एक या कई महीने उसे किसी गैर मुस्लिम मर्द के साथ रश्म निभाने लिए पति पत्नी की तरह महीनों रहना पड़ता है। इसको ही हलाला कहते है। हलाला में औरत को अपनी मर्ज़ी के बिना अपने जिस्म को किसी दुसरे मर्द के साथ परोसना पड़ेगा।

तीन तलाक अब अपराध-सरकार का अध्यादेश | Triple Talaq ordinance- Now three-year jail term
तीन तलाक अब अपराध-सरकार का अध्यादेश | Triple Talaq ordinance- Now three-year jail term



निष्कर्ष:
एक सभ्य समाज में ऐसी प्रथा आज भी प्रचलित है , सोचकर भी बहुत बुरा लगता है। औरत को एक वस्तु समझा जाता है। गलती आदमी की होती ही है और भुगतना औरत को पड़ता है ओर भुगतना भी कैसा की उसे ना केवल गैर मर्द के साथ विवाह करना पड़ता है बल्कि उसे अपना जिस्म भी सौंपना पड़ता है। यह प्रथा संभ्रांत लोगो में भी प्रचलित है। बॉलीवुड की एक बहुत प्रसिद्ध अभिनेत्री ने अपने पति द्वारा दिये गये तीन तलाक के कारण जब उसे उनके दोस्त से शादी कर हलाला कराया गया तो बोला कि मुझमें ओर एक वेश्या में क्या फर्क है जब मैने अपनी बिना मर्ज़ी के अपना जिस्म दूसरे मर्द को सौंप दिया।
अंत में, मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि वहुविवाह, तीन तलाक तथा निकाह हलाला ये तीनो अमानवीय है और एक सभ्य समाज में ये युक्तिसंगत नहीं हैं। इनको कानूनन अपराध घोषित होना ही चाहिये । सरकार ने अभी इन तीनो में सिर्फ एक यानी तीन तलाक पर अध्यादेश लाकर अच्छा संकेत दिया है और आशा करते है कि 06 माह से  पहले जो तीन तलाक का विधेयक लोक सभा से पारित होकर राज्यसभा में लंबित पड़ा है । उसे सभी राजनीतिक दल अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर पारित करें। इस अध्यादेश से मुस्लिम महिलाओं को समाज में बेहतर सम्मान मिलेगा। मुस्लिम महिलाओं द्वारा इसका कब से बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था अब आकर उनके साथ न्याय होगा। अध्यादेश तो एक कदम है, सरकार को अध्यादेश समाप्ति से पहले इसे दोनों सदनों में विपक्षी दलों को साथ लेकर पारित करना चाहिए तथा मैं सरकार से गुजारिश करूँगा कि इसके बाद वहुविवाह तथा निकाह हलाला को भी कानून बनाकर समाप्त करना चाहिए। खासकर निकाह हलाला जैसी प्रथा जिसमें औरत को अपना जिस्म अपनी मर्ज़ी के बिना दूसरे मर्द को सौंपना पड़ता है, को तो जड़ से समाप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए तथा निकाह हलाला के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान भी करना चाहिए। सरकार ने निसंदेह भारत के संविधान में अनुच्छेद 44 में उल्लखित समान नागरिक संहिता की दिशा में ईमानदारी से प्रयास किया है। आशा करते है कि आगे आने बाले समय मे मुस्लिम महिलाओं को ओर भी अधिकार प्रदान करने वाले कानून सरकार पारित कराएगी।


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