Citizen Rights against Police Department in Hindi | पुलिस विभाग से संबधित नागरिक अधिकार क्या है?


Citizen Rights against Police Department in Hindi | पुलिस विभाग से संबधित नागरिक अधिकार क्या है?  

मस्कार दोस्तों आज मैं इस लेख में बताने बाला हूँ कि पुलिस विभाग से नागरिकों को क्या क्या अधिकार प्राप्त है? ( Citizen Rights against Police Department | पुलिस विभाग से संबधित नागरिक अधिकार क्या है?) 
अक्सर आपने देखा होगा की पुलिस थाना (police station) पर आप जब जाते हो तो पुलिस (police) आपको कार्य करने में आनाकानी करती है जबकि पुलिस (Police) उस कार्य को करने को बाध्यकारी होती है । आपको यदि अपने अधिकारों (Rights) के बारे में जानकारी है तो आप पुलिस (Police) से कार्य आसानी से कार्य करा सकते हो । पुलिस (police) ऐसे बहुत से कार्य भी करती है जिन्हे करने के लिए वह कानूनन रूप से अधिकार नहीं रखती किन्तु वह अपनी सुबिधा के लिए उसे करती है जैसे पुलिस को यदि बच्चो और महिलाओं से पूछताछ करनी है तो पुलिस को उनके घर जाना पड़ेगा। पुलिस उन्हें थाना बुलाकर पूछताछ नहीं कर सकती है, लेकिन जानकारी के आभाव में नागरिक उनका विरोध नहीं करते है। आप इस लेख से इसी के बारे में जानोगे कि पुलिस विभाग (police department) के सम्बन्ध में नागरिकों (Citizen) को क्या क्या अधिकार (rights) प्राप्त है ?
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आपके अधिकार क्या है ? What is your Rights against Police Department ?

  1. थाने पर दी गई किसी सूचना / प्रार्थना पत्र (complaint ) की प्रति अवश्य प्राप्त करें। यदि आप थाना पर शिकायत (complaint) लेकर जाते है तो पुलिस शिकायत (complaint) लेने से आनाकानी करती है तथा वह शिकायत (complaint) लेकर उसे प्राप्ति मुहर (stamp) लगाकर नहीं देती है जबकि पुलिस (police) ऐसा करने के लिए बाध्यकारी होती है। पुलिस को आपकी शिकायत लेकर उसे प्राप्ति कर एक प्रति उसे आपको देना चाहिए। 
  2. आपकी थाने पर दी गई सूचना / शिकायत (Information/complaint) प्रार्थना पत्र पर एफ.आई.आर.( FIR- First Information Report) / एन.सी.आर. (NCR-Non Cognizable Report) नि:शुल्क दर्ज की जाती है साथ साथ इसकी एक प्रतिलिपि (Copy) आपको / शिकायतकर्ता को नि:शुल्क प्रदान कर उस पर तत्काल कार्यवाही की जाती है। 
  3. आपके द्वारा दर्ज कराये गये मुकदमें (Crime) की तफ्तीश / विवेचना (Investigation) समाप्त होने पर मुकदमा का परिणाम की लिखित सूचना आपको प्रदान की जाती है। यह निशुल्क होती है । 
  4. पुलिस दूसरे थाने की घटना बताकर शिकायतकर्ता को प्राथमिकी(First Information Report) दर्ज़ करने में आनाकानी करती है तथा घटना को गलत सूचना कहकर आपकी एफ.आई.आर.(FIR- First Information Report)/ एन.सी.आर.(NCR- Non Cognizable Report) दर्ज करने से मना करती है, किन्तु पुलिस दूसरे थाने की घटना बताकर तथा घटना को गलत सूचना कहकर आपकी एफ.आई.आर.(FIR- First Information Report)/ एन.सी.आर.(NCR- Non Cognizable Report) दर्ज करने से मना नहीं कर सकती है। 
  5. पुलिस आपको बिना कारण बताए गिरफ्तार (Arrest) नहीं कर सकती है। Indian Constitution के अनुच्छेद 22 तथा code of criminal procedure 50 में यह प्रावधान है की पुलिस अभियुक्त या किसी व्यक्ति को गिरफ्तार (arrest) करते समय गिरफ़्तारी के कारण तथा जमानत के आधारों के बारे में बताएगी। 
  6. गिरफ्तारी की स्थिति में आपको अपना वकील (भारत के संबिधान के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत) रखने का अधिकार (Fundamental Right) है तथा यह पुलिस का दायित्व व् कर्तव्य है है कि वह आपकी गिरफ्तारी की सूचना आपके मित्र या निकट परिजनों (Friend or Relatives) को दें। 
  7. जिसका पोस्टमार्टम (Post-mortem) हुआ है उसके परिवार के सदस्यों को पोस्टमार्टम की प्रतिलिपि लेने का अधिकार है। मृतक के परिवार द्वारा पोस्टमार्टम (Post-mortem) रिपोर्ट की प्रति पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। 
  8. बच्चों और महिलाओं (children & woman) को पूछताछ हेतु थाने पर नहीं बुलाया जायेगा। पुलिस यदि महिलाओं और बच्चो ((children & woman)) से पूछताछ करना चाहती है तो पुलिस उन्हें थाने नहीं बुला सकती मतलब पुलिस पूछताछ को उनके मकान या घर पर ही जाना पड़ेगा। 
  9. महिलाओं की गिरफ्तारी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं की जा सकती है। यदि पुलिस महिलाओं की गिरफ़्तारी करना चाहती है तो सूर्योदय से सूर्यास्त तक यानि दिन में ही कर सकती है किन्तु केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में कानून के प्राविधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जा सकती है । 
  10. महिलाओं कि गिरफ़्तारी महिला पुलिस कर्मी ही कर सकती है। 
  11. महिलाओं कि पूछताछ के समय जैसे बलात्कार तथा शीलभंग के समय महिला पुलिस कर्मी ही व्यान अंकित करेगी । 
  12. नागरिकों से पूछताछ या गिरफ़्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी वर्दी (police uniform) में होंगे और उनके नेम प्लेट (Name-plate) साफ प्रदर्शित होगी तथा उसमे उनका नाम तथा पद का विवरण भी अवश्य होगा। 
  13. कोई भी पुलिस अधिकारी पूछताछ या गिरफ़्तारी (Enquiry & Arresting) के समय अपना पहचान पत्र (Identity Card) अवश्य साथ रखेंगें। 



नागरिकों को प्रदत्त सुविधायें:

  1. यातायात चालान (Traffic Challan) सम्बन्धी सभी कागजातों का शमन यानि शुल्क का भुगतान क्षेत्राधिकारी कार्यालय / अपर पुलिस अधीक्षक कार्यालय (DSP / Additional SP Office) से 07 कार्य दिवस के अन्दर होता है तथा बाद शुल्क का भुगतान /शमन कागजात भी उसी कार्यालय से प्राप्त होते हैं। थाना स्तर के कर्मचारी द्वारा थाने पर अनावश्यक रूप से आपको बुलाया नहीं जायेगा।
  2. शस्त्र लाइसेंस (Arms License), पासपोर्ट (Passport), पी.वी.आर.(PVR), जी.वी.आर.(GVR), एम.वी.आर.(MVR), सी.वी.आर.(CVR), सम्बंधित प्रार्थना पत्र आदि के सत्यापन के लिये आवेदक को थाने आने की अवश्यकता नहीं है।
  3. उत्तर प्रदेश के प्रत्येक थाने पर, प्रत्येक माह में 02 बार थाना दिवस का आयोजन होता है जिसमें राजस्व विभाग के साथ- साथ विद्युत,नगर निगम, जल संस्थान आदि विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहते हैं। थाना दिवस पर जन समस्यायें, उनका समाधान पुलिस एवं अन्य सरकारी विभागों के समन्वय से ही हो होता है ।शिकायत का आवेदन थाना दिवस पर थाना पर ही किया जाता है।
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